Dhanvantari Chalisa
करूं वंदना गुरू चरण रज, ह्रदय राखी श्री राम।मातृ पितृ चरण नमन करूँ, प्रभु कीर्ति करूँ बखान ॥१॥ तव कीर्ति आदि अनंत है , विष्णुअवतार भिषक महान।हृदय में आकर विराजिए,जय धन्वंतरि भगवान ॥२॥ जय धनवंतरि जय रोगारी। सुनलो प्रभु तुम अरज हमारी ॥१॥ तुम्हारी महिमा सब जन गावें। सकल साधुजन हिय हरषावे ॥२॥ शाश्वत है … Read more